नज़्मशाला में हम शब्दों की शक्ति का जश्न मनाते हैं। कविता, कहानी और रचनात्मक खोज की यात्रा के लिए जड़ें नज़्मशाला से ।
जब तक कोई मुंह पर बात ना कहे ,
तब तक यही समझना चाहिए कि उसने कुछ नहीं कहा।
~ प्रेमचंद ~
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें