नज़्मशाला में हम शब्दों की शक्ति का जश्न मनाते हैं। कविता, कहानी और रचनात्मक खोज की यात्रा के लिए जड़ें नज़्मशाला से ।
रद्दी तक तोली जाती है तराज़ू में बिकने से पहले,
तुम्हें कोई परख रहा तो इसमें बुरा क्या है !
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